रायपुर, 01 अक्टूबर। Collector Conference : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को नई धार देने की तैयारी में हैं। दशहरा पर्व के ठीक बाद वे 12 अक्टूबर से तीन दिवसीय मैराथन बैठकें करेंगे, जिसमें प्रदेश के कलेक्टर्स, एसपी और डीएफओ से सीधे वन टू वन चर्चा की जाएगी।
बैठकों का शेड्यूल
12 अक्टूबर: कलेक्टर्स कांफ्रेंस- विकास योजनाओं की समीक्षा
13 अक्टूबर (सुबह): कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस- लॉ एंड ऑर्डर और प्रशासनिक समन्वय
13 अक्टूबर (दोपहर): कलेक्टर-डीएफओ कांफ्रेंस- वन, पर्यावरण और जनजातीय योजनाओं की समीक्षा
14 अक्टूबर: गुड गवर्नेंस समिट में सीएम की विशेष भागीदारी
कई योजनाओं की गहन समीक्षा होगी
मुख्यमंत्री साय इन बैठकों में प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जनमन योजना, जनजातीय कल्याण, वन अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, और लॉ एंड ऑर्डर जैसे अहम मुद्दों पर सीधे फील्ड अफसरों से जानकारी लेंगे। यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से डीएफओ से सीधी बातचीत कर वन विभाग की योजनाओं की प्रगति पर चर्चा करेंगे।
कांफ्रेंस की प्रशासनिक तैयारियां शुरू
मुख्यमंत्री सचिवालय से सभी जिलों के कलेक्टर्स व एसपी को पत्र भेज दिया गया है। इसके बाद से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। गृह विभाग को कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस और वन विभाग को कलेक्टर-डीएफओ कांफ्रेंस के लिए नोडल विभाग बनाया गया है।
एजेंडा की तैयारी अंतिम चरण में
सभी विभागीय सचिवों को निर्देशित किया गया है कि वे 6 अक्टूबर तक कांफ्रेंस का एजेंडा अंतिम रूप में मुख्यमंत्री सचिवालय व सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को भेज दें।
योजनाओं की जमीनी हकीकत जानना
मुख्यमंत्री का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाएं जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं या नहीं। इसके साथ ही कानून व्यवस्था और वन क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों के फील्ड स्तर के अनुभव को भी संज्ञान में लिया जाएगा।
नज़र रखिए इन बिंदुओं पर
- सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच
- वन अधिकार पत्रों की स्वीकृति और वितरण
- कानून व्यवस्था में एसपी की कार्यप्रणाली
- आदिवासी क्षेत्रों में संपर्क और सेवाएं
- “गुड गवर्नेंस” के मॉडल की प्रस्तुति और प्रभाव
विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की यह मैराथन बैठकें गुड गवर्नेंस और फील्ड लेवल मॉनिटरिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। अफसरों के लिए यह जवाबदेही तय करने और योजनाओं की गति को तेज करने का अवसर होगा।

