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Prohibition of Alcohol : वादों की बोतल में बंद सियासत का नशा…? ट्रिगर बना आबकारी मंत्री का बयान…यहां सुनिए बैक टू बैक Video

Prohibition of Alcohol: Is the intoxication of politics bottled up in promises? The Excise Minister's statement triggered... Listen to back-to-back videos here.

Prohibition of Alcohol

रायपुर/सक्ती, 18 सितंबर। Prohibition of Alcohol : छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद, धर्मांतरण और बेरोजगारी जैसे बड़े मुद्दों के बीच शराबबंदी एक ऐसा वादा रहा है, जो हर चुनाव से पहले सिर चढ़कर बोलता है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद… कहीं धुंधला सा दिखता है।

2018 में कांग्रेस ने किया वादा…लेकिन शराबबंदी गायब

2018 में कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र में पूर्ण शराबबंदी का वादा किया। सत्ता भी मिली, जनादेश भी, मगर शराबबंदी… वादों की फाइल में ही बंद रह गई। उल्टा, शराब सिंडिकेट और आबकारी घोटालों के आरोपों में खुद कांग्रेस घिरती चली गई। अब राज्य में बीजेपी की सरकार है और कांग्रेस को फिर से हाथ लगा है वही पुराना, लेकिन असरदार मुद्दा- शराबबंदी।

ट्रिगर बना आबकारी मंत्री का बयान

बीते दिनों प्रदेश के आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन का बयान सामने आया जिसमें उन्होंने कहा, अच्छी दुकानें खुलेंगी तो शौकीन लोग अच्छे से जाएंगे। इस बीच कांग्रेस ने सरकार को आड़े हाथों लेने में देर नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने तीखा हमला बोलते हुए पूछा, क्या सरकार का काम जनता को शराब पिलाना है? रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे मुद्दों पर कब बात होगी?

एक ओर कांग्रेस शराबबंदी न कर पाने की सजा भुगत चुकी है, तो वहीं अब बीजेपी प्रीमियम शराब दुकानों की वकालत कर रही है। सवाल ये है कि जनता के हिस्से में क्या आया? घटिया शराब, अवैध कारोबार और खोखले दावे।

सक्ती में नकली शराब से दो मौतें

सक्ती ज़िले में नकली शराब से दो मौतें हो गईं। शिकायतें हैं कि नकली होलोग्राम, अवैध शराब और शराब माफिया का नेटवर्क आज भी पूरी तरह सक्रिय है। मंत्रीजी ने ज़रूर कलेक्टर और एसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन सवाल है कि एक तरफ मौतें हो रही हैं…दूसरी तरफ प्रीमियम शराब दुकानों की बात हो रही है।

तो क्या है शराबबंदी सिर्फ चुनावी नारा?

शराबबंदी छत्तीसगढ़ की राजनीति में अब तक सिर्फ वादा बनकर रही है। कांग्रेस वादा करके भूल गई, बीजेपी अब उसे ‘राजस्व और ब्रांड वैल्यू’ से तौल रही है। शराबबंदी पर चल रही ये दोहरी राजनीति, आखिरकार जनता को ही सजा दे रही है- आर्थिक रूप से टूटते परिवार, अपराध में इजाफा, और नकली शराब से होती मौतें। और अंत में सबसे बड़ा सवाल- क्या छत्तीसगढ़ में शराबबंदी सिर्फ चुनावी जुमला है…या कभी ज़मीन पर भी उतरेगी?

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