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Jagdalpur Circuit House : मंत्री केदार कश्यप पर कर्मचारी से मारपीट का आरोप…! सियासत गरमाई तो पूर्व CM बघेल ने PM Modi की मां से जोड़ा मामला…यहां सुनिए VIDEO

Jagdalpur Circuit House: Minister Kedar Kashyap accused of beating an employee...! When politics heated up, former CM Baghel linked the matter to PM Modi's mother... Listen to the video here

Jagdalpur Circuit House

जगदलपुर, 07 सितंबर। Jagdalpur Circuit House : छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित सर्किट हाउस में एक संविदा कर्मचारी से कथित मारपीट और गाली-गलौज का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शनिवार शाम की इस घटना ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है।

मंत्री केदार कश्यप पर आरोप है कि उन्होंने कमरे की चाबी देर से देने पर कर्मचारी खिंतेंद्र पांडे से कथित अभद्र व्यवहार किया। हालांकि इस पर खुद सर्किट हाउस के अन्य कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मामला इतना गंभीर नहीं था, मंत्री ने केवल नाराजगी जताई और हल्की फटकार दी थी।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ट्वीट

मामले को गरमाते देख पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माता से जोड़ते हुए ट्वीट कर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा, क्या सिर्फ प्रधानमंत्री की मां ही मां हैं? और मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का संतुलित रुख

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने संयम और शालीनता का परिचय देते हुए कथित पीड़ित कर्मचारी से फोन पर बातचीत की और आश्वासन दिया कि कांग्रेस उसके साथ खड़ी है।

क्या थी असल वजह?

घटना के बारे में जानकारी देते हुए कर्मचारी शिवचरण यादव ने बताया कि विवाद मंत्री के नहीं, बल्कि उनके साथ आए एक समर्थक की शिकायत से शुरू हुआ। मंत्री जी हमेशा सहयोगी रहे हैं और पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी।

सूत्रों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम कुछ समर्थकों द्वारा जानबूझकर तूल देने से बिगड़ा। जिस तेजी से यह घटना मीडिया और नेताओं तक पहुंची, उससे एक साजिश की आशंका भी जताई जा रही है।

मंत्री की छवि सवालों के घेरे में

केदार कश्यप को बस्तर में एक सौम्य और शालीन नेता के रूप में जाना जाता है। ऐसे में उन पर लगे आरोपों को लेकर कई लोग संशय जता रहे हैं। स्थानीय जनता और कर्मचारियों के बीच उनकी व्यवहारिकता को लेकर अच्छी राय रही है।

घटना की पूरी सच्चाई और दोष किसका है- मंत्री, उनके समर्थक या संविदा कर्मचारी, यह जांच का विषय है। लेकिन स्पष्ट है कि अब यह एक प्रशासनिक विवाद नहीं रहा, बल्कि सियासी घमासान का रूप ले चुका है।

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