रायगढ़, 03 सितंबर। Digital Revolution :छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले ने ग्रामीण पारदर्शिता और तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। जिले की 549 पंचायतों में क्यूआर कोड आधारित नई प्रणाली शुरू की गई है, जिससे अब मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) से जुड़े कार्यों की जानकारी लोगों को महज एक स्कैन में उपलब्ध होगी।
अब नहीं लगेंगे पंचायत के चक्कर
ग्रामीणों को अब अपने गांव में पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत व्यक्तिगत और सामुदायिक कार्यों की जानकारी के लिए न तो दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, और न ही अधूरी या अपुष्ट सूचनाओं पर निर्भर रहना होगा। अब स्मार्टफोन से क्यूआर कोड स्कैन करते ही उन्हें संबंधित कार्य का नाम, लागत, प्रगति और अन्य विवरण एक क्लिक में मिल जाएंगे।
पारदर्शिता नीति का मजबूत कदम
यह पहल केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया अभियान और राज्य सरकार की पारदर्शिता नीति के तहत लाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य है, ग्रामीणों को योजनाओं की निगरानी का अधिकार देना, उन्हें विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
सातों ब्लॉकों में लागू
सितंबर महीने से रायगढ़ जिले के सभी 7 ब्लॉकों, रायगढ़, खरसिया, पुसौर, घरघोड़ा, लैलूंगा, तमनार और धरमजयगढ़ की पंचायतों में यह क्यूआर कोड प्रणाली सक्रिय रूप से लागू की जा रही है। हर पंचायत भवन या सूचना पट्ट पर यह क्यूआर कोड प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रशिक्षण और तकनीकी जागरूकता का जोर
ग्रामीणों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि वे क्यूआर कोड स्कैनिंग और उपयोग में दक्ष हो सकें। इससे डिजिटल साक्षरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
गांव से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया
खरसिया ब्लॉक के एक निवासी ने कहा, “पहले जानकारी के लिए पंचायत या जनपद कार्यालय जाना पड़ता था, अब मोबाइल से ही सब मिल रहा है। इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो रही है।”
अन्य जिलों के लिए मॉडल बनेगा रायगढ़
विकास विशेषज्ञों का मानना है कि रायगढ़ का यह डिजिटल मॉडल जल्द ही अन्य जिलों के लिए आदर्श उदाहरण बनेगा। इससे, योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। सामुदायिक निगरानी मजबूत होगी। ग्राम स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
जिला प्रशासन का विश्वास है कि यह सूचना के लोकतंत्रीकरण (डेमोक्रेटाइजेशन ऑफ इंफॉर्मेशन) की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

