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Rajat Mahotsav : खनिज संसाधन विभाग की 25वीं बैठक सम्पन्न…! सचिव पी. दयानंद ने दिया सतत विकास के लिए खनिज नीति पर जोर

Rajat Mahotsav: 25th meeting of Mineral Resources Department concluded...! Secretary P. Dayanand emphasized on mineral policy for sustainable development

Rajat Mahotsav

रायपुर, 21 अगस्त। Rajat Mahotsav : रजत महोत्सव के तहत राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में खनिज संसाधन विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान भू-विज्ञान कार्यक्रम मंडल की 25वीं (सिल्वर जुबिली) बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ की खनिज नीतियों, अनुसंधान व सतत अन्वेषण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

सचिव पी. दयानंद ने दिया व्यवस्थित खनिज अन्वेषण पर जोर

इस अहम बैठक की अध्यक्षता खनिज संसाधन विभाग और मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद ने की। उन्होंने कहा, यह 25वीं सिल्वर जुबिली बैठक न केवल उपलब्धियों का मूल्यांकन करने का अवसर है, बल्कि यह भविष्य के खनिजीय विकास और वैज्ञानिक खोज को दिशा देने का मंच भी है।   

सतत और व्यवस्थित खनिज अन्वेषण पर जोर दिया गया। अनुसंधान और समन्वय बढ़ाने के लिए विभिन्न माइनिंग एक्सप्लोरेशन टीमों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई गई। ट्रेडिशनल बल्क मिनरल्स जैसे कोयला और बॉक्साइट के साथ-साथ अब राज्य स्ट्रेटेजिक व डीप-रूटेड मिनरल्स (जैसे लिथियम) पर काम कर रहा है।

कटघोरा में पहला लिथियम ब्लॉक ऑक्शन में गया

बैठक में जानकारी दी गई कि छत्तीसगढ़ का पहला लिथियम ब्लॉक कटघोरा क्षेत्र में खोजा गया है और उसका नीलामी (ऑक्शन) भी हो चुका है। यह रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बॅटरी तकनीक में भारत की आत्मनिर्भरता के लिहाज से।

रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी विभाग का फोकस

दक्षिण बस्तर, महासमुंद और बलरामपुर जैसे क्षेत्रों में रेयर अर्थ मिनरल्स की संभावनाओं पर भी गहन चर्चा हुई। इन खनिजों का ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक महत्व है।

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में कदम

पी. दयानंद ने कहा कि, झारखंड और ओडिशा की तुलना में छत्तीसगढ़ का GSDP शेयर बेहतर है। राज्य न केवल खनिज उत्पादन में अग्रणी है, बल्कि वन संरक्षण और माइनिंग में संतुलन बनाए रखने की नीति भी अपना रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ में 44% से अधिक क्षेत्र वन भूमि है, इसलिए विकास कार्यों में पर्यावरणीय संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

खनिज संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक खनन के साथ-साथ रणनीतिक और दुर्लभ खनिजों की दिशा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहा है। रजत महोत्सव के अवसर पर यह बैठक न केवल उपलब्धियों का उत्सव थी, बल्कि भावी विकास के लिए नीति निर्धारण का भी एक अहम मंच साबित हुई।

 

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