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Anticipatory Bail : भूपेश बघेल ने SC में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल…इस दिन होगी सुनवाई

Anticipatory Bail: Bhupesh Baghel filed anticipatory bail petition in SC... Hearing will be held on this day

Anticipatory Bail

रायपुर, 03 अगस्त। Anticipatory Bail : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल ने गोपनीय मामलों में गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है। इसमें CBI और ED की शक्तियों व अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी गई है, विशेष रूप से ये सवाल उठाया गया है कि क्या इन एजेंसियों ने PMLA और अन्य सम्बंधित क़ानूनों के तहत अपने कार्यक्षेत्र से बाहर निकलकर सरकारी अत्यधिक हस्तक्षेप किया है या नहीं। यह याचिका सोमवार (4 अगस्त, 2025) को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

याचिका में शामिल है

मुद्दा बिंदु
शराब–कोयला–‘महादेव सट्टा’ इनमें आरोप ED और CBI द्वारा अभियोजन की मुख्य सामग्री में शामिल है कि 2019–22 के बीच राज्य खज़ाने से कम से कम ₹2,161 करोड़ की कथित हेराफ़ेरी की गई- इसमें ‘महादेव ऐप’ सट्टा, CSMCL से जुड़े कमीशन, और कोयला सीमा शुल्क (levy) मामले शामिल हैं। इन सभी जांचों में बेटे समेत संघ से जुड़े अन्य अधिकारी, व्यवसायी और नौकरशाह आचरण में संलिप्त बताए जा रहे हैं।
राजनीतिक पश्चाताप (Political Vendetta) याचिका में आरोप है कि चैतन्य की गिरफ्तारी उनके जन्मदिन पर बिना समन या आरोपपत्र के की गई, और उनका नाम FIR या किसी गवाह बयान में नहीं है। भूपेश बघेल का दावा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक द्वेष और बुरे इरादे से प्रेरित है और व्यक्तिगत प्रतिशोध का परिणाम है।
जांच में सहयोग की पेशकश याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भूपेश बघेल उनसे पूछताछ को टालने का प्रयास नहीं करते, बल्कि पूरी ईमानदारी से जांच एजेंसियों से सहयोग देने का अवसर प्रदान किए जाने की मांग की गई है, बजाय गिरफ्तारी के।

चैतन्य बघेल की स्थिति

17 जुलाई 2025 को ED ने चैतन्य को मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) केस में गिरफ्तार किया। तत्पश्चात रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश कर, उन्हें पहले 5 दिनों की ED रिमांड, और बाद में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत दी गई। उनकी जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दाखिल की गई है — जिसमें कहा गया है कि FIR और गवाह बयानों में उनका नाम नहीं था, फिर भी गिरफ्तारी की गई है।

कानूनी विश्लेषण और महत्व:

  1. सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रारंभिक रूप से कार्रवाई से बचने की मांग- यह उस पहले से ही मौजूद प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है जहाँ न्यायालय सीधे हस्तक्षेप कर एजेंसियों के अधिकारों को सीमित करता है।
  2. PMLA अधिकार क्षेत्र पर पुनर्विचार- पिछले कुछ सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से यह स्पष्ट हुआ है कि PMLA का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है; इस मामले में भी अदालत की राय देखने योग्य होगी।
  3. सत्ताज्ञान और एजेंसियों के दुरुपयोग पर सुनवाई- कोर्ट सुनवाई करते समय इस बात पर भी विचार कर सकती है कि क्या इन केंद्रीय जांच एजेंसियों का प्रयोग विपक्षी राजनीतिक दलों को दबाने के लिए किया गया है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक बार ED को चुनौती देने की बात कह चुका है कि राजनीतिक लड़ाई अदालतों में नहीं, वोटिंग बूथ पर लड़ी जानी चाहिए।

अगली कार्रवाई

सोमवार, 4 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट में समन तरीके की वैधता, एजेंसियों की कार्यप्रणाली, गिरफ्तारी की सीमाएं, और जमानत मिलने योग्य परिस्थितियों पर बहस होगी। यदि याचिका स्वीकार होती है, तो यह गिरफ्तारी प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली में एक नया पूर्वानुमान (precedent) बन सकती है।

घटनाओं का पृष्ठभूमि

मार्च 2025 में सीडी कांड में CBI की विशेष अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, आरोपपत्र में पर्याप्त सबूत नहीं होने की वजह से। अदालत ने कहा “उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। महादेव सट्टा ऐप, शराब कमीशन, और कोयला लेवी घोटाला को मिलाकर ED की ओर से दर्ज विभिन्न FIR में भूपेश बघेल, उनके करीबी, संलग्न अधिकारियों और व्यवसायियों को नामजद किया गया है। जांच अभी जारी है।
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