Action Against Builders : वालफोर्ट ग्रुप के मालिक पंकज लाहोटी की अवैध इमारत ध्वस्त…! पहली बार शहर के बड़े बिल्डरों पर बड़ी कार्रवाई

Action Against Builders : वालफोर्ट ग्रुप के मालिक पंकज लाहोटी की अवैध इमारत ध्वस्त…! पहली बार शहर के बड़े बिल्डरों पर बड़ी कार्रवाई

रायपुर, 03 अगस्त। Action Against Builders : रायपुर नगर निगम ने बोरियाखुर्द में करीब 25 एकड़ भूमि पर वालफोर्ट ग्रुप और अन्य कॉलोनाइज़र्स द्वारा की गई अवैध प्लाटिंग एवं भवन निर्माण का प्रकरण थाना पुलिस को सौंपा है। इस कार्रवाई से जुड़े प्रमुख नामों में समूह के मुखिया पंकज लाहोटी और योगेंद्र वर्मा शामिल हैं। यह पहली बार है जब निगम ने बड़े बिल्डर के विरुद्ध ऐसा कदम उठाया है। हालांकि अब तक पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की है।

बुलडोज़र से प्राथमिक कार्रवाई

नगर निगम की टीम जोन कमिश्नर, नगर निवेश विभाग, तहसील कार्यालय व क्षेत्रीय बीएमबीपी ने अवैध कॉलोनी बनाने और निर्माणाधीन भवनों की थ्री-डी डेमो‍लिशन करवाई, निर्माणाधीन मुरूम रोड काटे गए, डीपीसी बेस निकाल दी गई और विद्युत कनेक्शन तुरंत काट दिए गए। इस कार्रवाई में लगभग 16 अवैध भवन भी शामिल थे।

उच्च श्रेणी की संगठित आपराधिक प्लॉटिंग

नगर निवेशक आभाष मिश्रा ने कहा कि मामले की धारा 292 (नगर निगम अधिनियम‑1956) के तहत कार्रवाई की गई है, जिसमें निगम को “प्लाटिंग एरिया तहस‑नहस करने” तथा “सड़क‑मार्ग काटने” का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहली बार है जब निगम ने जमीनी स्तर से बड़े बिल्डर को नामदर्ज कर ऐसे प्रकरण पुलिस को सौंपे हैं।

बड़े बिल्डर की भूमिका पर सवाल

बोरियाखुर्द ज़िग्गा‑जमीनों में आमतौर पर छोटे उम्र के भूमाफिया सक्रिय होते आए हैं, लेकिन पहली बार बड़े संगठित कॉलोनाइज़र्स का नाम सामने आया। इसमें भूमि स्वामित्व, धारा‑विभाजन, नक्शा‑प्लान और डायवर्सन अनुमति की गंभीर कमियाँ उजागर हुई हैं। अवैध कॉलोनी में जाने वाले गृहियों को अक्सर सड़क, बिजली, नाली जैसे आधारभूत सुविधाएं नहीं मिलती, साथ ही मकानों पर नक्शा पास न होने की वजह से बैंक लोन प्राप्त करने में बाधा आती है।

फिलहाल जांच की दिशा

नगर निगम ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय को प्रकरण सौंपते हुए नामजद FIR दर्ज करने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन पुलिस प्रक्रिया में अभी FIR दर्ज नहीं कर सकी है। निगम ने तहसीलदार से जमींदारों की पहचान हेतु खसरा‑बीट‑बाउंड्री की जानकारी मांगी गई है, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सके।

अब सवाल उठते हैं

  • क्या यह मामला केवल פרטिक जमीनों तक सीमित है या राज्य भर के प्लॉटिंग माफ़िया‑बिल्डर नेटवर्क पर असर करेगा?
  • निगम की कार्रवाई आगे राजस्व एवं पंजीयन विभाग के समन्वय से जितनी मजबूत होगी, निकाय व शासन स्तर की मुक़ाबला क्षमता उतनी ही प्रभावशाली होगी।
  • अब यह देखने की बारी है कि पुलिस कब तक नामजद FIR दर्ज करती है, दोषी कौन होंगे, और कोर्ट में कब तक नियमित अटल इंवेस्टिगेशन प्रक्रिया शुरू होती है।
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