Chhatarpur News
छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले से दहेज प्रथा की एक और शर्मनाक घटना सामने आई है, जहां एक सरकारी अधिकारी ने स्कॉर्पियो कार की मांग पूरी न होने पर ऐन शादी के दिन बारात लाने से इनकार कर दिया। इस घटना ने न सिर्फ दुल्हन का दिल तोड़ा, बल्कि समाज के उस चेहरे को भी उजागर किया जो आज भी दहेज के लालच से मुक्त नहीं हो पाया है।
मामला छतरपुर जिले के गढ़ीमलहरा क्षेत्र का है। यहां ग्राम पंचायत नुना की रहने वाली युवती, जो खुद राजनगर जनपद पंचायत में सहायक विकास विस्तार अधिकारी के पद पर कार्यरत है, उसकी शादी दलपतपुर ग्राम पंचायत के रहने वाले कृष्णकांत पटेल से तय हुई थी। कृष्णकांत जनपद पंचायत में मिल असिस्टेंट ऑडिटर के पद पर तैनात है। शादी की बातचीत के दौरान दहेज का सामान्य लेन-देन तय हुआ था, लेकिन स्कॉर्पियो जैसी महंगी कार की मांग तब नहीं की गई थी।
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शादी की तारीख 11 मई 2025 तय की गई थी। कार्ड छप चुके थे, रिश्तेदारों को न्योते भेजे जा चुके थे और मंडप सज चुका था। लेकिन जैसे-जैसे शादी का दिन नजदीक आता गया, लड़के वालों की तरफ से स्कॉर्पियो कार की मांग शुरू हो गई। जब लड़की के पिता यह डिमांड पूरी नहीं कर सके तो दूल्हे ने बारात लाने से साफ इनकार कर दिया।
दुल्हन अपने हाथों में दूल्हे के नाम की मेहंदी लगाए बैठी रह गई, लेकिन बारात नहीं आई। यह जानकर वधू पक्ष के लोग गढ़ीमलहरा थाने पहुंचे और दहेज के लालच में शादी तोड़ने वाले लड़के पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
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लड़की के पिता ने बताया कि पहले ही गोद भराई की रस्म में लड़के को सोने की अंगूठी, डेढ़ लाख रुपये नगद और अन्य उपहार दिए जा चुके थे। फिर भी शादी के नजदीक आते-आते लड़के वालों की मांगें बढ़ती गईं।
यह मामला न सिर्फ दहेज प्रथा की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि पढ़े-लिखे और सरकारी पदों पर बैठे लोग भी इस सामाजिक बुराई से अछूते नहीं हैं। दहेज जैसी कुप्रथा आज भी समाज में जड़ें जमाए हुए है। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा और नौकरी के बावजूद भी जब तक सोच नहीं बदलेगी, तब तक बेटियों के अरमान यूं ही टूटते रहेंगे।
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