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Chhattisgarh Naxali Encounter : कररेगुट्टा के जंगलों में नक्सलियों पर कहर, 4 दिन से जारी ऑपरेशन, हेलीकॉप्टर से बमबारी, अब तक 6 नक्सली ढेर

Chhattisgarh Naxali Encounter

छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कररेगुट्टा की पहाड़ियों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ का आज चौथा दिन है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच चल रहे इस भीषण ऑपरेशन को अब तक का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान माना जा रहा है। इस ऑपरेशन में देश के तीन राज्यों छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र की संयुक्त फोर्स शामिल है, जिसमें करीब 5000 जवान जंगल में उतर चुके हैं।

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बता दें कि इस अभियान में पहली बार भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया है, जिनकी मदद से जंगलों में न सिर्फ जवानों को उतारा जा रहा है, बल्कि नक्सलियों पर हवाई बमबारी भी की जा रही है। इससे पहले कभी भी इतनी बड़ी रणनीति के तहत नक्सलियों को घेरने की कार्रवाई नहीं देखी गई थी। ऑपरेशन का उद्देश्य हिडमा जैसे कुख्यात और वांछित नक्सली कमांडरों को ढूंढकर उन्हें मार गिराना है। हिडमा वही माओवादी नेता है जिसे दक्षिण बस्तर में कई जानलेवा हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है।

Chhattisgarh Naxali Encounter

वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सुरक्षाबलों ने अब तक 6 नक्सलियों को मार गिराया है। तीन के शव और हथियार बरामद किए जा चुके हैं। इस मुठभेड़ के दौरान जवानों को एक बेहद गहरे गुप्त बंकर का भी पता चला है, जो जमीन से करीब 160 फीट नीचे था और जिसके ऊपर मजबूत कंक्रीट की स्लैब डली हुई थी। इस बंकर से भारी मात्रा में गोला-बारूद, छह सोलर पैनल और नक्सलियों की वर्दियां बरामद की गई हैं। इसके अलावा जंगल के भीतर फैले 12 अलग-अलग ठिकानों से नक्सलियों के डंप जब्त किए गए हैं।

इस ऑपरेशन की शुरुआत बुधवार को हुई थी और तब से लगातार जंगल में रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है। सुरक्षाबलों ने कररेगुट्टा की पहाड़ियों के सात किलोमीटर के दायरे को चारों तरफ से घेर रखा है। हालांकि हिडमा और कुछ अन्य बड़े नक्सली नेता अब तक फरार होने में सफल रहे हैं, लेकिन STF के जवानों का पीछा लगातार जारी है।

इस अभियान के बीच भीषण गर्मी भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। अब तक 15 से ज्यादा जवान लू की चपेट में आ चुके हैं, जिन्हें तेलंगाना के वेंकटापुरम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके बावजूद बाकी जवान पूरी मजबूती से जंगल में डटे हुए हैं और नक्सलियों की खोज में एक-एक इंच जमीन छान रहे हैं।

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