Waqf Amendment Bill
नई दिल्ली। संसद में एक ऐतिहासिक क्षण तब आया जब वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लंबी बहस और जोरदार विरोध के बावजूद राज्यसभा से बहुमत के साथ पारित कर दिया गया। इस विधेयक के पक्ष में 128 वोट पड़े, जबकि 95 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। इससे पहले यह बिल लोकसभा में भी बहुमत से पारित हो चुका है। अब केवल राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा।
राज्यसभा में 13 घंटे से ज्यादा लंबी बहस
गुरुवार दोपहर 1 बजे यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया। इसके बाद लगभग 13 घंटे तक मैराथन बहस चली, जो शुक्रवार तड़के 2:32 बजे खत्म हुई। अंत में वोटिंग में सरकार को बहुमत मिला और विधेयक पारित हो गया।
Waqf Amendment Bill
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
इस विधेयक को लेकर संसद में कड़ा विरोध देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इसे मुस्लिम विरोधी और असंवैधानिक बताते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए मुस्लिम वक्फ संपत्तियों को कॉरपोरेट कंपनियों को सौंपने की योजना है। वहीं, सरकार का कहना है कि यह विधेयक ऐतिहासिक सुधार लाएगा और वक्फ बोर्ड को अधिक पारदर्शी बनाएगा।
सरकार का पक्ष
- केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में कहा कि यह विधेयक मुसलमानों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनके हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड एक वैधानिक निकाय है, जिसे धर्मनिरपेक्ष बनाया जाना चाहिए।
ऐतिहासिक सुधार: सरकार का दावा है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड को पारदर्शी बनाएगा और उसमें जवाबदेही तय करेगा। - सबका साथ, सबका विकास: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि यह विधेयक किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके हक की रक्षा के लिए लाया गया है।
- वक्फ बोर्ड धर्मनिरपेक्ष निकाय बनेगा: मंत्री ने तर्क दिया कि अन्य सरकारी निकायों की तरह वक्फ बोर्ड भी धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए, और इसमें गैर-मुस्लिमों की सीमित भागीदारी से कोई नुकसान नहीं होगा।
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विपक्ष की आपत्ति
विपक्षी दलों ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वक्फ संपत्तियों को हड़पने की योजना बना रही है और इस विधेयक के जरिए गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करके उसकी स्वायत्तता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
- मुस्लिम विरोधी कानून: विपक्षी दलों का कहना था कि यह विधेयक मुसलमानों की संपत्तियों को हड़पने का एक षड्यंत्र है।
- संविधान विरोधी: विपक्ष ने इसे संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ बताया।
- वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता खत्म होगी: इस कानून के जरिए सरकार गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने की योजना बना रही है, जिससे मुसलमानों के धार्मिक संस्थानों पर बाहरी हस्तक्षेप बढ़ेगा।
अब आगे क्या?
अब इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, जहां उनकी मंजूरी के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।
वक्फ संशोधन विधेयक में क्या बदलाव होंगे?
- सेंट्रल वक्फ काउंसिल में 22 सदस्य होंगे, जिनमें अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।
- वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा।
- सरकार के अनुसार, इससे किसी मुसलमान को कोई नुकसान नहीं होगा।
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राज्यसभा में क्या हुआ – एक नज़र
- विधेयक पेश करने का समय: गुरुवार दोपहर 1 बजे
- बहस का समय: 13 घंटे से ज्यादा
- वोटिंग का समय: शुक्रवार तड़के 2:32 बजे
- पक्ष में वोट: 128
- विरोध में वोट: 95
वक्फ संशोधन विधेयक 2025 संसद से पास हो चुका है, लेकिन इसे लेकर राजनीति गर्मा गई है। विपक्ष इसके खिलाफ आवाज बुलंद कर रहा है, जबकि सरकार इसे सुधारवादी कदम बता रही है। अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति की मंजूरी पर टिकी हैं।
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