WARRIOR OF REZANGLA WAR
रायपुर। वैसे तो भारतीय सेना की कई शौर्य गाथाएं हैं, जिसमें जवानों के अदम्य साहस और बलिदान सामने आते हैं। ऐसी एक गाथा है रेजांगला के युद्ध की। यह युद्ध भारतीय सेना ने तब लड़ा था। जब भारत संपन्न नहीं था और लगातार युद्ध झेल रहा था। चीन की ओर से किए गए हमले के दौरान रेजांगला में मारवाड़ के लाल मेजर शैतान सिंह भाटी के नेतृत्व में 1300 चीनियों का सिर्फ 114 भारतीयों ने मुकाबला किया और चीनियों को नाकों चने चबाए थे।

इसी बलिदान दिवस के दिन आज छत्तीसगढ़ प्रगतिशील यादव महासंघ, रायपुर द्वारा आज रेजांगला दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसमे भारत-चीन सीमा पर 1962 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए चीनी सैनिकों के छक्के छुड़ा देने वाले वीर बलिदानियों की शहादत को नमन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
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इस कार्यक्रम का नाम ‘एक दीया शहीदों के नाम’ रखा गया है। शहीद स्मारक भवन परिसर में यह आयोजन आज यानि सोमवार को शाम 5 से 6 बजे के बीच होगा। इस अवसर पर शहीदों के बलिदान को याद किया जाएगा।

आज से ठीक बासठ वर्ष पूर्व 18 नवंबर 1962 को भारत व चीन के बीच हुए रेजांगला युद्ध में रेवाड़ी के दो सगे भाइयों ने बलिदान दिया था। इस युद्ध में रेवाड़ी जिले के गांव धवाना के किसान श्योकरण यादव के दो पुत्र नायक सिंह राम यादव और सिपाही रामकुमार यादव ने एक ही बंकर में बलिदान दिया।

बता दें कि 18 नवंबर को 1962 को जम्मू-कश्मीर के लेह-लद्दाख क्षेत्र में स्थित सामरिक महत्व की चौकी रेजांगला पर चीन ने रात में धावा बोल दिया था। यहां 13 कुमाऊं की सी कंपनी तैनात थी जिसमें तीन जेसीओ सहित 124 जवान तैनात थे। करीब अठारह फीट की ऊंचाई पर माइनस 40 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर हुई इस बर्फीली जंग में 114 जवान शहीद हो गए थे।
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