Bastar dussehra
बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बुधवार को बड़ी धुम-धाम के साथ कुटुंभ जात्रा की रस्म पूरी की गई। इस यात्रा में देवी–देवताओं की अंतिम विदाई दी जाती है। वही इस यात्रा में राजपरिवार के सदस्य कमल चंद भंजदेव ने सभी देवी देवताओं की पूजा अर्चना की।

दरअलसल, 75 दिनों तक चलने वाला ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व अब समाप्ति की ओर है. कुछ ही दिनों के बाद इस पर्व खत्म हो जाएगा। दशहरा पर्व की एक रस्म कुटुंब जात्रा बुधवार को निभाई गई। पूरे विधि विधान के साथ जगदलपुर शहर बस्तर दशहरे की इस खास रस्म को संपन्न कराया गया। इसमें बस्तर संभाग के तमाम इलाकों व पड़ोसी राज्यों से पहुंचे देवी देवताओं का पूजा पाठ किया गया और जात्रा किया गया. इस रस्म के दौरान कई बकरों की बलि दी गई।
Bastar dussehra
देवी देवताओं की होती है विदाई
बस्तर राज परिवार सदस्य कमलचंद्र भंजदेव ने बताया कि कुटुंब जात्रा में दंतेश्वरी देवी के साथ ही जितने भी देवी देवता शामिल हुए हैं। उनकी विदाई का यह कार्यक्रम है। विदाई के दौरान छत्र के मुख और दंडी को अलग कर दिया जाता है जिसके बाद सभी देवी देवताओं को जिया डेरा में सलामी देकर विदाई का कार्यक्रम पूर्ण किया जाता है।
मन्नत पूरा होने पर बकरे की बलि
पुजारी परमेश्वर नाथ ने अनुसार आज विधि-विधान के साथ कुटुंब जात्रा रस्म निभाई गई। इस साल के नवरात्रि में जिन लोगों ने मन्नत मांगी थी, वे अपने वादे के अनुसार भेंट चढ़ा रहे हैं। यह परंपरा दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, और भक्त भी उत्साह से बलि के लिए बकरे अर्पित कर रहे हैं।
Bastar dussehra
इस यात्रा में राज्यों के देवी देवता शामिल
बता दें कि, इस कुटुंभ जात्रा में कोंटा से लेकर कांकेर जिले व सीमावर्ती राज्य ओडिशा, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना के देवी देवता भी इस बस्तर दशहरा में शामिल होते हैं जिन्हें विदा किया गया।

