SCO Summit 2024
इस्लामाबाद। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की 23वीं बैठक आज यानी मंगलवार 15 अक्टूबर से पाकिस्तान में शुरू हो रही है। इस बैठक में भाग लेने के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर शाम को राजधानी इस्लामाबाद पहुंचेंगे। बता दें कि इस्लामाबाद में होने वाली दो दिवसीय एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक के लिए 76 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और एससीओ के सात प्रतिनिधि पहुंचने शुरू हो गए हैं।

जहां एससीओ शिखर सम्मेलन में अर्थव्यवस्था, व्यापार और पर्यावरण के क्षेत्र में चल रहे सहयोग पर चर्चा की जाएगी। जयशंकर 16 अक्टूबर को एससीओ समिट 2024 के दौरान संबोधन देंगे। वहीं भारत सरकार ने अपने बयान में कहा है कि विदेश मंत्री जयशंकर का यह दौरा भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा के लिए नहीं बल्कि एक बहुपक्षीय आयोजन के लिए है। वहीं भारत के अलावा इस बैठक में रूस और चीन समेत 8 देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

SCO Summit 2024
इसके मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम के लिए इस्लामाबाद में लॉकडाउन लगा दिया गया है। साथ ही पूरे शहर में 3 दिन के लिए छुट्टी की घोषणा कर दी गई है। पाकिस्तान सरकार ने अनुच्छेद 245 का इस्तेमाल करके इस्लामाबाद में सेना के जवानों को तैनात कर दिया है। दरअसल यह दो दिवसीय सम्मेलन देश में बढ़ते आतंकी हमलों और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी की ओर से जारी विरोध-प्रदर्शनों के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका के बीच होने जा रहा है। तो वहीं इस बैठक में अर्थव्यवस्था, कारोबार और पर्यावरण समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
इन देशों के नेता होंगे शामिल
नौ साल बाद भारतीय विदेश मंत्री का दौरा
शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शहर शंघाई में हुई थी। आपको बता दें कि नौ साल बाद भारतीय विदेश मंत्री पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे हैं। इससे पहले साल 2015 में आखिरी बार सुषमा स्वराज ने बतौर विदेश मंत्री पाकिस्तान की यात्रा की थी।

वास्तव में शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना साल 2001 में चीन और सोवियत संघ का हिस्सा रहे चार मध्य एशियाई देशों ने की थी। इनमें कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। इसका उदय रूस, चीन और इन मध्य एशियाई देशों के बीच वर्ष 1996 में सीमा को लेकर हुए एक समझौते के साथ हुआ था। इसे ‘शंघाई फाइव’ समझौता कहा गया। चीन और रूस शुरू से इसके सदस्य हैं। तो वहीं भारत साल 2005 से इस संगठन का सदस्य था पर 2017 में इसका स्थायी सदस्य बन गया।


