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Shardiya Navratri 6th Day : नवरात्रि के छठे दिन देवी के स्वरूप कात्यायनी की करें पूजा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र भोग और आरती

Shardiya Navratri 6th Day

रायपुर। आज शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि है। आज के दिन से ही दुर्गा पूजा का आगाज हो जाता है। नवरात्रि का 6वां दिन मां कात्यायनी की पूजा- अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुर्गा मां के छठे स्वरूप देवी कात्यायनी की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही सुख समृद्धि में भी वृद्धि होती है। पुराणों के अनुसार, देवी कात्यायनी ऋषि कात्यायन की पुत्री थीं । इसीलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा।

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एक अन्य मान्यता यह भी है कि गोपियों ने श्रीकृष्ण की प्राप्ति के लिए मां कात्यायनी की आराधना की थी। तभी से ऐसा कहा जाता है कि जो भी कन्या मां की पूजा करती है तो माता के आशीर्वाद उसे मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। मां कात्यायनी पूरे ब्रजमंडल की अधिष्ठदात्री देवी हैं।आइए जानते हैं मां के छठे स्वरूप , उनकी पूजा विधि, मंत्र, आरती से लेकर भोग तक की पूरी जानकारी।

Shardiya Navratri 6th Day

पूजा का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 40 मिनट से लेकर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करना शुभ रहेगा।

मां कात्यायनी के मंत्र जाप

मां कात्यायनी भोग

मां कात्यायनी को शहद या मीठे पान का भोग लगाना बेहद शुभ माना गया है। माना जाता है कि इससे व्यक्ति को किसी प्रकार का भय नहीं सताता। इसके अलावा मां कात्यायनी को गुड़ भी अर्पित कर सकते हैं।

Shardiya Navratri 6th Day

मां कात्यायनी की पूजा विधि
मां कात्यायनी की आरती

जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जग माता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते। हर मन्दिर में भगत है कहते॥
कत्यानी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुडाने वाली। अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए। ध्यान कात्यानी का धरिये॥
हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी माँ को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥

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मां कात्यायनी का स्वरूप

मां दुर्गा का ये स्वरूप अत्यंत ही दिव्य है। इनका रंग सोने के समान चमकीला है तो इनकी चार भुजाओं में से ऊपरी बायें हाथ में तलवार और नीचले बायें हाथ में कमल का फूल है। जबकि इनका ऊपर वाला दायां हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे का दायां हाथ वरदमुद्रा में है ।

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