Chashma Wali Devi
बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के कांगेर वैली नेशनल पार्क के कोटमसर गांव में देवी बास्ताबुंदिन का मंदिर है। इन्हें चश्मे वाली देवी के नाम से भी जाना जाता है, जिन्हें भक्त काला चश्मा चढ़ाते हैं फिर प्रसाद स्वरूप अपने साथ लेकर जाते हैं, यह मान्यता सदियों से चली आ रही है।
ग्रामीणों की मान्यता है कि देवी मां जंगल को हरा-भरा रखती हैं, और जंगल के साथ ही सबकी रक्षा भी करती हैं। स्थानीय लोगों में एक पुरानी मान्यता है कि देवी एक नेत्र रोग विशेषज्ञ की तरह हैं जो सालों भर उनकी आंखों की रक्षा और देखभाल करती हैं और खासकर गर्मियों और बरसात के मौसम में जब आंख आती (संक्रामक रोग) है। इसलिए गांव के लोग देवी को प्रसन्न करने और अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए धूप का चश्मा चढ़ाते हैं।
Chashma Wali Devi
कोटमसर में हाल ही में धार्मिक मेला आयोजित किया गया था जिसमें कई गांवों से सैकड़ों आदिवासी लोग एकत्रित हुए थे। लोगों का मानना है कि देवी एक इंसान हैं, उन्हें भी बीमारी हो सकती है,
इसलिए हम उन्हें आंखों की बीमारी और अन्य सभी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव के लिए चश्मा चढ़ाते हैं और वह हमें आशीर्वाद देती हैं। हमें यह भी विश्वास है कि उन्हें ऐसा चढ़ावा चढ़ाने से वह तीन साल में एक बार हमारी मनोकामनाएं पूरी करके प्रसन्न होती हैं। यह परंपरा कई सालों से निभाई जा रही है।

