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Pune Porsche Accident : पुणे पोर्शे एक्सीडेंट केस में पुलिस ने की बड़ी कार्रवाई, नाबालिग आरोपी का पिता भी गिरफ्तार, बालिग की तरह चलेगा मुकदमा

Pune Porsche Accident

पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार की रात अपनी तेज रफ्तार पोर्श कार से दो लोगों को कुचलने वाले नाबालिग आरोपी को निचली अदालत ने अजीबो-गरीब शर्तों पर जमानत दे दिया था। वारदात के 15 घंटे बाद आरोपी को जमानत देते हुए अदालत ने उसे ट्रैफिक पुलिस के साथ 15 दिन काम करने को कहा। आरोपी के वकील प्रशांत पाटिल ने जानकारी देते हुए बताया कि कोर्ट ने नाबालिग के लिए दुर्घटनाओं पर निबंध लिखने, शराब पीने की आदत का इलाज कराने और काउंसलिंग सेशन लेने की शर्त रखी है।

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कोर्ट के इस फैसले के बाद पुणे पुलिस ने मामले में सेशन कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस फुल एक्शन मोड में आते हुए, पुलिस ने मंगलवार को औरंगाबाद जिले से आरोपी नाबालिग लड़के के रियल एस्टेट डेवलपर पिता को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले सोमवार को पुलिस ने हाईकोर्ट से आरोपी पर वयस्क अभियुक्त के रूप में मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है। पुलिस ने आरोपी के पिता के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। इससे पहले निचली अदालत ने पुलिस की अपील को खारिज कर दिया था।

खबरों से मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात रियल एस्टेट एजेंट का नाबालिग बेटा एक पब में बैठकर दोस्तों के साथ पार्टी कर अपनी पोर्श कार से लौट रहा था। इस दौरान टेबल पर शराब की बोतलों का ढेर भी लगा हुआ है। इससे साफ जाहिर होता है कि एक्सीडेंट करते वक्त नाबालिग नशे में धुत्त था। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि पोर्श कार 200 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की स्पीड से चल रही थी। कार पर नंबर प्लेट भी नहीं थी।

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उस समय ही मध्यप्रदेश के रहने वाले दो इंजीनियर अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा भी बाइक से लौट रहे थे। तेज रफ्तार कार ने अश्विनी की बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही अश्विनी हवा में करीब 20 फुट तक उछला और फिर जमीन पर गिर गया। उसका दोस्त अनीश भी कार पर गिरा। गंभीर चोट के कारण दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। अश्विनी और अनीश इंजीनियर थे और पुणे की एक कंपनी में नौकरी करते थे।

वहीं, हादसे में जिस अनीश अवधिया की मौत हुई है, उनके चाचा अखिलेश अवधिया ने कहा, नाबालिग पर लगाई गई जमानत की शर्तें सच में हास्यास्पद हैं। उन्होंने लापरवाही के लिए महाराष्ट्र पुलिस की आलोचना की। उन्होंने नाबालिग को ‘मानव बम’ कहा। अवधिया के मुताबिक नए अधिनियम के अनुसार सजा सात साल होनी चाहिए , सिर्फ इसलिए रिहा करना क्युकी कि वो एक बिजनेस टाइकून का बेटा है। और वो 3 करोड़ रुपये की कार चला रहा था।

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