Surya Grahan 2024 : आज 4 मिनट 28 सेकेंड तक धरती के 250 किमी में दिखेगा साल का पूर्ण सूर्यग्रहण, जानें सूतक और कब, क्यों होता ग्रहण…?

Surya Grahan 2024 : आज 4 मिनट 28 सेकेंड तक धरती के 250 किमी में दिखेगा साल का पूर्ण सूर्यग्रहण, जानें सूतक और कब, क्यों होता ग्रहण…?

Surya Grahan 2024

रायपुर। आज यानी सोमवार की दोपहर इस साल का पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने को मिलने वाला है। खास बात है कि ये पूर्ण सूर्य ग्रहण होते हुए भी धरती के एक बेहद छोटे हिस्से में ही दिखा, जो आमतौर पर 250 किलोमीटर के व्यास वाला क्षेत्र है, बाकी की पूरी पृथ्वी पर इसी ग्रहण को आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में ही देखा गया है। चूंकि भारत में इसका सीधा कोई असर नहीं होगा सूतक काल भी नहीं माना जाएगा।

जैसा कि हम जानते हैं हमारा ग्रह पृथ्वी बहुत बड़े तारे, यानी सूर्य के चारों और चक्कर लगा रहा है। इसी तरह हमारी पृथ्वी का एक उपग्रह चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगा है है। सूर्य की परिक्रमा करती पृथ्वी की परीक्रमा चंद्रमा करता है। अब इसमें क्या होता है कि चक्कर काटते-काटते कभी-कभी चंद्रमा अपने ग्रह पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, जिसके कारण पृथ्वी पर रहने वालों के लिए सूर्य का दिखना बंद हो जाता है।

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इस स्थिति को कहते हैं सूर्य ग्रहण। इस स्थिति में पृथ्वी से सूर्य को पूरी तरह या आंशिक रूप से देखा जाना संभव नहीं रहता, दरअसल, ऐसी हालत में चंद्रमा सूरज की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से रोक देता है, और पृथ्वी पर सूर्य का दिखना बंद हो जाता है। उम्मीद है आपको सूर्य ग्रहण की खगोलीय स्थिति समझ आ गई होगी यही स्थिति आज हुई है।

किस हिस्से में कितनी देर तक रहेगा ग्रहण

अब आपको बताते हैं आज का सूर्यग्रहण धरती के किस हिस्से में पूर्ण ग्रहण हुआ। इसे ऐसे समझिए कि 8 अप्रैल 2024। अमेरिका में घड़ी 2:04 PM बजाएगी और आसमान में सूरज छिपना शुरू हो जाएगा। करीब 74 मिनट बाद आसमान से सूरज लगभग गायब हो जाएगा।

4 मिनट 28 सेकेंड तक ऐसी ही स्थिति रहेगी। इस दौरान सूर्य 88% ढंक जाएगा और करीब 5 डिग्री सेल्सियस तक तापमान भी गिर जाएगा। आपको बता दें कि
आज 54 साल में सबसे लंबा सूर्य ग्रहण अमेरिका के कुछ हिस्सों में रहेगा।

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क्या होता है पूर्ण सूर्यग्रहण

यह आकाशीय या खगोलीय घटना हमेशा अमावस्या पर ही होती है। ध्यान रहे, पूर्ण सूर्य ग्रहण को भी पृथ्वी के एक बेहद छोटे हिस्से में ही देखा जा सकता है, जो आमतौर पर ज़्यादा से ज़्यादा 250 किलोमीटर के व्यास में आने वाला क्षेत्र होता है, तथा शेष पृथ्वी पर उसी ग्रहण को आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में ही देखा जा सकता है।

अपनी गति के चलते चंद्रमा को पूर्ण सूर्य ग्रहण के मौके पर सूर्य के सामने से गुज़रने में लगभग दो घंटे का वक्त लगता है, और इसी दौरान चंद्रमा ज़्यादा से ज़्यादा सात मिनट के लिए सूर्य को पूरी तरह ढकता है, और इस दौरान पृथ्वी के उस हिस्से में दिन के समय भी रात जैसा माहौल बन जाता है। इस ग्रहण को पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं.

आंशिक सूर्य ग्रहण

इस स्थिति में चंद्रमा अपने ग्रह पृथ्वी से कुछ अधिक दूरी पर होता है, और सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता। ऐसे हालत में सूर्य का कुछ ही हिस्सा पृथ्वी से दिखना बंद होता है, और सूर्य का कुछ हिस्सा ग्रहण से ग्रसित होता है, तथा कुछ हिस्सा बिल्कुल अप्रभावित रहता है। ऐसी स्थिति वाले ग्रहण को आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण

यह एक स्थिति ऐसी होती है, जब चंद्रमा पृथ्वी से काफ़ी दूर होता है, और ऐसी स्थिति में पृथ्वी और सूर्य के बीच आने पर सूर्य का सिर्फ़ बीच का हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाता है और पृथ्वी से सूर्य पूरी तरह ढकता नहीं तो वह, छल्ले की तरह दिखाई देता है। यानी सूर्य का बीच का हिस्सा अंधकारमय हो जाता है, जबकि उसके ढके हुए हिस्से के बाहर का हिस्सा रोशनी-युक्त छल्ले जैसा दिखता है, जिसे वलय भी कहा जाता है। इस आकार में दिखने वाले सूर्यग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

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