Supreme Court reprimanded Udhayanidhi Stalin for making indecent remarks about Sanatan Dharma
सुप्रीम कोर्ट में आज संतान धर्म में टिप्पणी करने वाले डीएमके नेता और तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन को जमकर फटकार पड़ी। कोर्ट ने फटकार लगते हुए कहा की वह एक राजनिति नेता है और उन्होंने अपने अधिकारों का दुरूपयोग किया है। सनातन धर्म के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाले स्टालिन की याचिका मामले पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने सोमवार को सुनवाई की।

उदयनिधि ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ देशभर के विभिन्न हिस्सों में दर्ज मुकदमों को क्लब करने की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट में स्टालिन की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बैंगलोर, उत्तर प्रदेश, बिहार और जम्मू में मुकदमे दर्ज किए हैं, जिसके एक साथ मिला देना चाहिए.
इस पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वो दर्ज हुए मुकदमों की मेरिट पर टिप्पणी नहीं कर रहे, लेकिन इसका असर एफआईआर क्लब पर नहीं पड़ना चाहिए। सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया और कहा अपराधिक मामलों में क्षेत्राधिकार तय होना चाहिए. ऐसे में उदयनिधि स्टालिन के वकील सिंघवी की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई अगले हफ्ते के लिए टाल दी है.

उदयनिधि की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस दत्ता ने बेहद सख्त टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा, ‘आपने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धर्म के प्रचार-प्रसार की स्वतंत्रता के अधिकार का दुरुपयोग किया है और अब आप अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट से राहत मांग रहे हैं?’ जस्टिस दत्ता ने इसके साथ ही कहा, ‘आप आम आदमी नहीं हैं, राजनेता हैं. आपको पता होना चाहिए था कि इस तरह की टिप्पणी का क्या नतीजा होगा.’

