CBI Raid on Satypal Malik नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के पूर्व-गवर्नर सत्यपाल मलिक के घर और दफ्तर पर सीबीआई का छापा पड़ा है, ये छापा जम्मू-कश्मीर में किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट 2 हजार 200 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के मामले में मारा गया है, छापामार कार्रवाई के दौरान सीबाआई के अधिकारियों ने मलिक के दिल्ली स्थित आवास और दफ़्तर की तलाशी ली. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में भी 30 ठिकानों पर रेड मारी है.
CBI Raid on Satypal Malik सीबीआई के छापे पर सत्यपाल मलिक का रिएक्शन भी सामने आया है, उन्होंने ट्वीट कर कहा ‘पिछले 3-4 दिनों से मैं बिमार हूं और अस्पताल में भर्ती हूं. जिसके वावजूद मेरे मकान में तानाशाह द्वारा सरकारी एजेंसियों से छापे डलवाएं जा रहें हैं. मेरे ड्राईवर, मेरे सहायक के ऊपर भी छापे मारकर उनको बेवजह परेशान किया जा रहा है. मैं किसान का बेटा हूं, इन छापों से घबराऊंगा नहीं. में किसानों के साथ हूं’
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मोदी के खिलाफ मुखर रहे सत्यपाल मलिक
गौरतलब है कि सत्यपाल मलिक भाजपा सरकार में राज्यपाल रहते हुए भी और उसके बाद भी केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मुखर रहे हैं, उन्होंने पीएम मोदी की तुलना तानाशाह करते आने वाले लोकसभा चुनाव में मोदी के खिलाफ वोट करने की भी अपील की थी. वह किसानों और महिला पहलवानों के प्रदर्शन के मुद्दे पर मोदी सरकार की आलोचना कर चुके है, उन्होंने पीएम मोदी की सरकार को पुलवामा हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया था.

CBI Raid on Satypal Malik एक इंटरव्यू में मलिक ने कहा था कि सीआरपीएफ ने जम्मू से श्रीनगर अपने जवानों को ले जाने के लिए 4 एयरक्राफ्ट मांगे थे लेकिन गृह मंत्रालय ने उनके अनुरोध पर एक्शन नहीं लिया, जिसकी वजह से उन्हें सड़क के रास्ते जाना पड़ा और पुलवामा हमला हो गया, किसानों के मुद्दे पर भी सत्यपाल मलिक ने कहा था कि जब मैंने किसानों से बात करने के लिए पीएम मोदी को कहा तो उन्होंने मुझसे कहा कि किसान खुद ही चले जाएंगे, फिर दो महीने बाद कृषि कानूनों को वापस ले लिया और तब से ही मेरी बातचीत पीएम मोदी के साथ बंद हो गई, इतना ही नहीं महिला पहलवानों के धरने पर भी सत्यपाल मलिक सरकार को घेर चुके हैं.
सत्यपाल मलिक को करोड़ो की रिश्वत ऑफर हुई थी
जम्मू-कश्मीर का गवर्नर रहते वक्त सत्यपाल मलिक ने बड़ा दावा किया था, उन्होंने बताया था कि हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की 2 फाइलें क्लीयर करने के लिए उन्हें 300 करोड़ की रिश्वत की पेशकश की गई थी. सत्यपाल मलिक ने अपने बयान में कहा था कि जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल रहते वक्त उन्हें करोड़ों की रिश्वत ऑफर हुई थी, उस दौरान उनके पास दो फाइलें आई थीं, इनमें एक बड़े उद्योगपति और दूसरी महबूबा मुफ्ती और भाजपा की गठबंधन सरकार में मंत्री रहे एक व्यक्ति की थी, मलिक ने कहा था कि उनके सचिवों ने बताया कि प्रोजेक्ट में घोटाला हुआ है, इसके बाद उन्होंने दोनों डील रद्द कर दी थीं, मलिक ने ये भी कहा था कि उन्हें दोनों फाइलों के लिए 150-150 करोड़ रुपए देने का ऑफर दिया गया था.
CBI Raid on Satypal Malik मलिक ने कहा, ‘मैंने कहा था कि मैं पांच कुर्ता-पायजामे के साथ आया हूं और सिर्फ उसी के साथ यहां से चला जाऊंगा, जब CBI पूछेगी तो मैं ऑफर देने वालों के नाम भी बता दूंगा’ उधर, CBI ने प्रोजेक्ट मामले में 2 FIR दर्ज की थीं. पहली FIR लगभग 60 करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट को जारी करने में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है, यह रकम 2017-18 में जम्मू-कश्मीर कर्मचारी स्वास्थ्य देखभाल बीमा योजना का ठेका देने के लिए एक इंश्योरेंस कंपनी से रिश्वत के तौर पर ली गई थी. दूसरी FIR 2019 में एक निजी फर्म को कीरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के सिविल वर्क के लिए 2 हजार 200 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट देने में भ्रष्टाचार से जुड़ी है, फिलहाल CBI इन दोनों मामलों की जांच कर रही है.

सत्यपाल मलिक का सियासी सफर
CBI Raid on Satypal Malik उत्तर प्रदेश के बागपत के रहने वाले सत्यपाल मलिक मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से पढ़े लिखे हैं. उनके सियासी करियर की शुरुआत 1974 में बागपत से विधायक के रूप में हुई थी, 1980 में सत्यपाल मलिक लोकदल से संसद के उच्च सदन राज्यसभा पहुंचे. फिर यूपी के अलीगढ़ से एमपी बने, 1996 में समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट मिला मगर इसी सीट पर हार का सामना करना पड़ा, 2004 में बीजेपी का हिस्सा बने और चुनाव लड़ा लेकिन इस बार भी हार का स्वाद चखना पड़ा था. 2012 में वह बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए और फिर उन्हें एक-एक कर के 4 राज्यों के राज्यपाल की जिम्मेदारी निभाई। बिहार में 2017 में, जम्मू कश्मीर 2018 , गोवा 2019 और मेघालय 2020. इन चार राज्यों के राज्यपाल रहने के दौरान उनकी सबसे ज्यादा चर्चा में जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के तौर पर हुई है.

